Save Paradise from Petrol Disaster — Protect the greatest treasures of the Indian Ocean! – BIHAR TODAY EXPRESS
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Save Paradise from Petrol Disaster — Protect the greatest treasures of the Indian Ocean!

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The island nation of Mauritius hosts breathtaking marine and terrestrial ecosystems of international importance, including the Blue Bay Marine Park and its thousand-year-old brain coral.






On July 25th, the Japanese cargo ship MV Wakashio deviated from the international shipping lanes and ran aground on a Mauritian coral reef, cracking the hull. It held approximately 3,800 metric tons (MT) of fuel, and after 12 days stranded on the reef without adequate government efforts to deal with the crisis, leaked 1000 MT of toxic fuel into one of the most beautiful lagoons on the island. On August 15th, the ship finally cracked into two, drenching sensitive marine life in even more toxins.






I am one of thousands of local people battling night and day to try to contain the damage this Japanese ship is causing to our homelands and livelihoods.
We are calling on the Governments of Mauritius and Japan to act immediately to stop the devastation and save our paradise.





The extent of the pollution and its long-term impacts on marine life will take time to analyze and must be continually monitored. Four precious ecosystems in the Mahebourg lagoon — including two Ramsar sites, or wetland sites of recognized international importance — have already suffered biological and chemical impacts:






The world-famous Blue Bay Marine Park – home to the ancient brain coral and other unique coral species, sea turtle transit and incredible fish species; and Pointe D’esny – a 22-hectare mangrove forest 1.2 kms away.





The magical islet “Île aux Aigrettes” – one of the most prominent nature reserves in the Indian Ocean. A 25-hectare island just offshore, it contains some of the rarest species on the planet and is a refuge for unique trees, shrubs and flowers such as ebony and the Calvaria tree that was once thought to be entirely dependent on the Dodo for its survival, and the Dragon plant or bois chandelle. All of these have been on the brink of extinction and have been painstakingly tended for many years..






The Lagoon itself – had just been revitalized after years of hard work and was teeming with marine species and blooming corals. But all this regeneration is threatened, and it’s a race against time to remove the oil before coral spawning starts.






The natural ecosystems are not the only ones to suffer from this catastrophic spill. Many people on the coastline depend on the lagoon for their very survival — the whole chain from pleasure craft owners, divers, fishmongers and pineapple sellers will be affected for years. Without a clean lagoon, they can’t provide for their families or send their kids to school.





They have already been severely hit by COVID19: UN data shows that inequality is rising and poverty expanding. Those operating in the informal sector will be left furthest behind — unless we join together to ensure they are supported.






Why was the ship sailing so dangerously close to the reef? Why have the Japanese companies involved — Nagashiki Shipping and Mitsui OSK Lines (one of the largest and wealthiest shipping companies in the world) done so little since the ship ran aground? What is their plan for reducing the damage to the environment, and the pain and suffering of those whose livelihoods depend on it?





We volunteers are stepping in, but it’s not enough. We need to be louder and more powerful together.





We want rapid action to clean up the spill using environmental best practices and with full implementation of the polluter pays principle for the costs. We want assurances that the affected communities, including the already marginalized workers in the informal sector, will be adequately compensated and supported.





We want answers. We request an independent, fully-funded inquiry to determine what happened and how the response could have been improved. Disaster could have been averted during the twelve days that the vessel was trapped on the reef.





We want the owners of this ship to stop using this route. If you can’t respect the precious ecosystems, you should stop using the “innocent passage” to transit the area. And we want the companies to get out of fossil fuels.



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RRB NTPC: आप परीक्षा में शामिल हो पाएंगे या नहीं, इस तरह करें चेक!

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PC application status: आरआरबी ने एनटीपीसी परीक्षा के लिए एप्लीकेशन स्टेटस चेक करने का लिंक सक्रिय कर दिया है। इस खबर में दिए लिंक से आप जान सकते हैं कि आपका आवेदन स्वीकार हुआ है या नहीं।

RRB NTPC application status check link: अब देश के करोड़ों उम्मीदवार यह चेक कर सकते हैं कि वे रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) की नॉन टेक्निकल पॉपुलर कैटेगरी भर्ती परीक्षा (NTPC Exam 2020) में शामिल हो सकते हैं या नहीं। आरआरबी ने दिसंबर 2020 में होने जा रही एनटीपीसी भर्ती 2019 की परीक्षा के लिए एप्लीकेशन स्टेटस चेक करने का लिंक सक्रिय कर दिया है।

जिन उम्मीदवारों ने इस परीक्षा के लिए आवेदन किया था, अब वे आरआरबी द्वारा जारी लिंक से चेक कर सकते हैं कि उनका आवेदन स्वीकार किया गया है या नहीं। अगर किसी आधार पर आपका एप्लीकेशन रिजेक्ट कर दिया गया है, तो आप परीक्षा में शामिल नहीं हो पाएंगे।

कैसे चेक करें एप्लीकेशन स्टेटस
आरआरबी की वेबसाइट rrbcdg.gov.inपर जाएं।
होम पेज पर आरआरबी एनटीपीसी एप्कीलेकशन स्टेटस से संबंधित लिंक पर क्लिक करें।नया पेज खुलेगा।एप्लीकेशन स्टेटस का पेज खुलेगा। यहां आरआरबी का वह रीजन सेलेक्ट करें, जिसके लिए आपने आवेदन किया था।

नया पेज खुलेगा। यहां दी गई जगह में अपना रजिस्ट्रेशन नंबर, जन्म तिथि और कैप्चा दर्ज कर लॉग-इन करें।
लॉग-इन करते ही आपका एप्लीकेशन स्टेटस स्क्रीन पर दिख जाए।

आरआरबी ने एनटीपीसी परीक्षा के लिए एप्लीकेशन स्टेटस चेक करने का लिंक आज (21 सितंबर 2020) सक्रिय किया है। उम्मीदवार 30 सितंबर 2020 तक अपने आवेदन का स्टेटस चेक कर सकते हैं। कुछ दिन पहले रेलवे द्वारा की गई घोषणा के अनुसार, आरआरबी एनटीपीसी सीबीटी-1 का आयोजन 15 दिसंबर 2020 को किया जाएगा।

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CTET News 2020: CTET का एडमिट कार्ड जल्द जारी होने की है संभावना, जानें क्या है लेटेस्ट अपडेट!

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CTET News 2020: परीक्षा कंप्यूटर आधारित टेस्ट मोड के माध्यम से ऑनलाइन मोड में आयोजित की जा सकती है-केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट ctet.nic.inपर CTET 2020 Admit Card जारी करने की उम्मीद है।Unlock होने के बाद कई प्रतियोगी परीक्षाएं भी आयोजित की जा रही है।इससे संभावना जताई जा रही है कि CTET 2020 Admit Card और परीक्षा डेट को लेकर नोटिफिकेशन जारी किया जा सकता है।

CTET 2020 Exam की तारीख जो पहले 5 जुलाई थी, कोविड -19 महामारी के कारण स्थगित कर दी गई थी।परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था CBSE ने अभी तक नई परीक्षा तिथियों की घोषणा नहीं की है।जिन उम्मीदवारों ने परीक्षा के लिए आवेदन किया है, वे CTET Admit Card का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।हालांकि इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है।

जिन उम्मीदवारों ने सफलतापूर्वक परीक्षा के लिए आवेदन किया था, वे आवश्यक लॉगिन विवरण दर्ज करके आधिकारिक वेबसाइट से अपना CTET Admit Card डाउनलोड कर सकेंगे।CTET Exam के बारे में सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए उम्मीदवारों की योग्यता निर्धारित करने के लिए सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट परीक्षा हर साल दो बार आयोजित की जाती है।परीक्षा कंप्यूटर आधारित टेस्ट मोड के माध्यम से ऑनलाइन मोड में आयोजित की जाती है।CTET का एडमिट कार्ड जारी होने के बाद उम्मीदवार इन स्टेप्स को फॉलो करके आसानी से अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं ।

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अब शिक्षक बनने के लिए चार साल की बीएड होगी जरूरी, नई नियम और पात्रता लागू!

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अब अगर शिक्षक बनना है, तो चार साल का बीएड करना अनिवार्य होगा। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने शिक्षक बनने के लिए नए नियम व पात्रता तय कर दी है। राज्य में भी जल्द शिक्षक भर्ती करने को लेकर इस नियम को लागू किया जाएंगा। शिक्षा अधिकारी शिक्षा नीति के प्रारूप को स्टडी करने में जुट गए है। बताया जा रहा है कि नई शिक्षा नीति में ग्रामीण क्षेत्र में कुछ विशेष मैरिट अधारित छात्रवृति को स्थापित किया जाएंगा, जिसके तहत चार वर्षीय बीएड डिग्री सफलता पूर्वक पूरा करने के बाद स्थानिय क्षेत्रों में रोजगार दिया जाएगा। शिक्षा अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार बीएड में छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति के तहत स्थानीय छात्रों को अपने ही क्षेत्र में रोजगार दिया जाएगा, जिससे की ये छात्र स्थानीय क्षेत्र के रोल मॉडल के रूप में और उच्चतर-योग्य शिक्षकों के रूप में सेवा कर सकें, जो स्थानीय भाषा बोलते हो।

नई शिक्षा नीति में कहा गया है कि उत्कृष्ठ शिक्षकों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षण कार्य करने के लिए प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा, विशेष रूप से ऐसे क्षेत्रों में जो वर्तमान में सबसे ज्यादा शिक्षक की कमी का सामना कर रहे है। फिलहाल नई शिक्षा नीति में शिक्षक बनने के लिए चार साल की रखी गई शर्त से अभ्यार्थिंयों के लिए चिंताएं खड़ी कर सकता है। दरअसल हिमाचल में अभी बीएड का कोर्स दो साल का होता है। अब चार साल का होने के बाद छात्रों को शिक्षक की ऐसी ट्रेनिंग दी जाएंगी, जिसमें उन्हें छात्रों के साथ कैसे व्यवहारिक व शैक्षणिक माहौल बनाना है, इस बारे में बताया जाएंगा। अहम यह है कि नई शिक्षा नीति में यह भी प्रावधान किया गया है कि शिक्षक व समुदाय के बीच संबंध बने और वह अपने समुदाय से जुड़ा रहे, जिससे छात्रों को रोल मॉडल और शैक्षिक वातावरण मिल सकें, इसके लिए शिक्षकों की ट्रासंफर पर रोक लगाई जाएंगी।

न्यू एजुकेशन पॉलिसी में साफ किया गया है कि बहुत ही विशेष परिस्थितियों में शिक्षकों के तबादले किए जाएंगे। इसके लिए अनिवार्य यह भी किया गया है कि ऑनलाइन ही शिक्षकों के तबादले किए जाएंगे। फिलहाल नई शिक्षा नीति को लेकर हिमाचल सरकार भी मसौदा तैयार करने में जुट चुकी है। सरकारी व प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों की परफोर्मेंस जांचने का कार्य भी स्कूलों में होगा। बता दे कि अभी शिक्षक बनने के लिए टेट, सेट, नेट, व डीएलएड अनिवार्य है, लेकिन अब बीएड को चार करने से शिक्षा में गुणवत्ता विभाग लाएगा।

शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार विषयों में शिक्षकों की पर्याप्त संख्या सुनिश्चित करने के लिए विशेष रूप से कला, शारीरिक शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा और भाषाओं जैसे विषयों में शिक्षकों को एक स्कूल या स्कूल कॉम्पलेक्स में भर्ती किया जा सकता है। प्रदेश सरकार इसको लेकर ग्रुपिंग ऑफ स्कूल का प्रारूप तैयार करेगा। फिलहाल नई शिक्षा नीति के नियमों को लागू करने से पहले शिक्षा अधिकारी इस पर स्टडी कर रहे है। बताया जा रहा है कि हिमाचल में शिक्षक भर्ती व ऑनलाइन तबादलों पर कार्य करने पर ज्यादा फोकस करेगा।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लिए हिमाचल में गठित की गई 43 सदस्यीय टास्क फोर्स कि 11 कमेटियां भी बनाई गई है। कमेटी में टास्क फोर्स के चार-चार सदस्यों को शामिल किया गया है। यह कमेटियां राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने के लिए अपने सुझाव देंगी। कमेटियों को सुझावों को सरकार के समक्ष रखा जाएगा। कमेटियों के सुझाव आने के बाद प्रदेश में अब टास्क फोर्स की आगामी बैठक होगी। कमेटियों को नीति के कुछ विषयों पर विस्तृत अध्ययन करने का जिम्मा भी सौंपा जाएगा।

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